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Thursday 30 April 2020

बिमला अबार कठै होयसी ! (कहानी - जनकराज पारीक)

मूल कहानी-जनकराज पारीक
राजस्थानी अनुवाद- डाॅ. हरिमोहन सारस्वत ‘रूंख’ 

अबार ई सरला री मौत रो समचार पूग्यो है. म्हानै इंयां लागै जाणै रमेस पचैरी सूं बेस्सी म्हूं बींरी हत्या रो दोसी हूं. म्हूं जार्णूं इं हत्या नै दायजै रो मामलो बणा’र सरला रै सासरलां पर मुकदमो चलाइजसी. मन्नै दुनिया री कोई कोरट कचेड़ी हत्यारो बणा’र हथकड़ी नीं घाल सकै अर रमेस पचैरी अबै रयो कोनी. साची बात आ है कै सरला री हत्या होवण रै लारै म्है अर रमेस पचैरी दोनूं हां. म्हानै इंयां भी लागै जाणै सरला रा सासरला इण हत्या सारू इत्ता दोसी नीं है जित्तो म्हूं.

ईं बात नै सावळ समझणै सारू आपां नै आठ बरस लारै बीं सागी दिन तांई पूगणो पड़सी जद रमेस पचैरी मरयो अर बिंरी ल्हास सारै बैठ’र म्हूं,, सरला अर बिमला अेक लाम्बी सीक काळी रात रो अेक अेक छिण छुलतां-छुलतां काढ्यो हो. बगत रो चकरियो जिंया कै थमग्यो होवै. अनिश्चय अर संका रै गैरै अन्धारै रो दुशालो ओढयां म्है तीनूं रमेस पचैरी री ल्हास खन्नै बैठ्या हा, मूरत बण्या, डाफाचूक सा, सोचां मांय गम्योड़ा.

रमेस पचैरी मेरो कोई सगो-समधी नीं हो, लंगोटियो भायलो भी नीं. बीं रै साथै बस इत्ती मिलगत ही कै म्हे दोनूं रसद विभाग मांय साथै काम करया करता. बींरो ओर कठई बेलिपो नीं हो इण सारू फगत म्हूं ई बींरो भायलो हो. बो फक्कड़ अर आपो आप मांय मस्त रैवणियो जीव हो, अर आपई बो मरग्यो. म्हारी मिलगत बींरै साथै इंया भी फिट कोनी बैठी कै बो दारूड़ियो हो अर म्हनै दारू रै नांव सूं ई चिड़. दारू री बांस सूं ई  मेरै नास्यां मांय बळत लाग जांवती, अर रमेस तो लुगाई रै चल्यां पछै बेथाग पिवण लाग्यो. मैं घणोई केवंतो ‘अबै भौजाई नीं रई. सरला अर विमला रो भविख ना बिगाड़. इंया हर घड़ी नसै मांय टुल्ल रैसी तो आं रा हाथ पीळा कुण करसी ?’ बो सदांई लड़खड़ांवती जबान सूं केवंतो ‘थूं है नीं मेरो भाई, तेरै थकां म्हानै क्यांरी चिन्ता? तन्नै छोड़ अठै दूजो है कुण? अेक भैन ही, बा कैन्सर सूं मरी गई, निपुतरी, बनेई दूसरो ब्या कर लियो, काका -बाबा, भाई भतीजा है ई कोनी, लुगाई अधबिच्चाळै दगो देयगी, अबै पीळीभीत सूं हजारूं कोसां रै आंतरै तेरै खन्नै बैठ्यो हूं.’

बीं री बातां सुण‘र म्हूं अबोलो रैय जांवतो अर आपरी जिंया तियां ठरड़ीजती गिरस्ती मांय पाछो बावड़ जांवतो जठै म्हूं हो, म्हारा थुड़पणां हा, अबखायां ही अर भाडै़ सट्टै री लियोड़ी जूण ही.

फरवरी री अेक काळीसीक रात नै लगैटगै नौ बज्यां सरला घबरायोड़ी सी म्हारै घर रो आडो खुड़कायो अर डरयोड़ी सीक बोली ‘ अंकलजी, म्हारै पापा रै कांई ठाह कांई हुग्यो, लोई री उल्टी होई है अर बै बेचेत पड़या है’.

रात नै नौ बज्यां म्हूं रमेस पचैरी नै ले’र सरकारी अस्पताल गयो हो अर इग्यारा बज्यां बींरी लास ले’र बावड़यो, बीं घड़ी घर मांय फगत म्है तीन जणा हा. ते’रा बरसां री सरला, दस बरसां री बिमला अर उमर रै बरसां बिच्चाळै जूझतो म्हूं. म्हूं पैली बिरियां देख्यो कै चाळीस वाट रै लट्टू रै च्यानणै  मांय बाप री मौत सूं अनाथ होई बेट्यां किंयां धीरज सूं बैठै. सरला अर विमला री आंख्यां मांय आंसू कोनी, अेक अणजाण सो डर हो. चैरै पर रोणो नीं अेक जड़ता ही अर होठां पर कोई किरळाटो, कोई हेलो, कोई बात नीं, अेक गैरो मून पसरयोड़ो हो. 

अबै के होसी अंकल? मून मांय डूबी सरला आखी रात मांय फगत इत्ती बात बोली ही कै बींरा पापा बतांवता कै दूर रै रिस्तै रो म्हारो अेक मामो फर्रूखाबाद रैवै.

अर म्हे तीनूं रमेस पचैरी री ल्हास रै असवाड़ै पसवाडै बैठ्या हा, पूरी रात अबोला, मून मांय.

सुबै भेळा होया- थोड़ा घणा लोग दफ्तर रा, गळी बास रा अर ई अणजाण सै’र रा. बोल-बतळावण रै मांय सगळा आप आप रै हिसाब सूं लेखो करै.

‘भोत माड़ो होयो भई, मईनै पैली मां अर अबै बाप रो आसरो ई बापड़ै टाबरां सूं खुसग्यो.’

‘ईं आदमी रै तो कोई कडूम्बो ई न्याड़-नैडास कोनी, अबै आं टाबरां रो कांई होसी?’

‘इसी मौत तो भगवान बैरी दुसमण नै ई नीं देवै’
‘मौत नीं भई, इण नै तो आत्महत्या ई केवणो चाइजै, पीळीयो होयोड़ो हो पण पीवणो नीं छोड्यो.‘

‘बातां छोड़ो यार, खापण तो देवणो पड़सी, आओ कीं  इन्तजाम करां.’

‘ठीक बात है, आपां नै ई करणो पड़सी, रिस्तेदारां तो कोई आंवता दिस्या कोनी पछै किनै उडीकणो है.’

जिंयां तिंयां किरिया करम पूरा सूरा करता थकां रमेस पचैरी रो बारो होयो. बेई सागी लोग भेळा होया जिका दाग री घड़ी हा, हां  रमेस पचैरी रै दूर रै रिस्तै मांय लागतो साळो गणेसी फर्रूखाबाद सूं आयग्यो हो. गंठीजेड़ै ठींगणै डील रै गणेसी रा  दांत कोडी सूं पीळा पड़योड़ा हा, पक्कै रंग रो गणेसी देखण मांय रेल्वे रो पेटवान लागतो हो अर बो हो ई. जरदै खैणी अर तास रो चासकू. मून मांय मस्त.

गरूड़ पुराण रो पाठ पूरो होग्यो अबै सवाल उठ्यो रमेस पचैरी रै मकान रो कांई हुवै? सरला अर विमला रै भविस रो के बणसी?

लोग गणेसी रै मुण्डै साम्ही जोवै हा,  सरला अर विमला डरयोड़ी हिरणी ज्यूं मन्नै तकै ही, म्हूं बान्नै देेखतां थकां देख्यो. सारो तकती अेक अबोली,  टाबरपणै री स्याणप सूं आस लगायोड़ी दीठ. बां दोनां रै बाई सागण ड्रेस पैरण नै ही जिकी बीं काळी अन्धारी रात ही, जद म्है तीनूं रमेस पचैरी री लास सारै आठ घण्टा तांई साथै बैठ्या रया हा. आभै वरणी कुड़ती अर धोळी सलवार, बिन्ध्योड़ै कानां मांय पतळी सींक अर छोटी-छोटी चोट्यां मांय लाल रिबन, पगां मांय काळी चपलां अर बस.., ओई बांरो हार सिणगार अर आई सज धज.

‘अबै तो मामै रै साथै ई जावणो पड़सी, क्यूं भाईजी ? और चारो ई के है ?’ अेक जणो सीधो ई मन्नै बोल्यो.

‘और करां भी के ?’ म्हारै सुर मांय उदासी सूं बेस्सी अणबस्सी ही.

‘अर ईं मकान रो कांई होसी ?’ कुण ई पूछ्यो, जिण रो ऊथळो मामै दियो अर जरदै री पिचकारी सी छूटगी ही ‘ इन्नै तो मन्नै बेचणो ई पड़सी’.

चाणचकै ई कुण ई सीधो म्हारै साम्ही सवाल राख्यो ‘सुभास, भाड़ै रै मकान  नै छोड’र तूं आं’रै साथै क्यूं नीं रैवै ? जित्तो भाड़ौ बठै देवै बीत्तै सूं आं छोरयां रो गुजारो हो जिसी.’

‘नीं नीं भई....., ओ नीं हो सकै..., म्हूं किंया..... कद तांई साम्ह सूं.....? मेरी आपरी गिरस्ती है, दुख दरद है.’

‘रमेस पचैरी थारो भायलो हो यार, पछै बींरी छोरियां थारी छोरी हुई का नीं ?’

‘ अर बेटी बणा’र नीं राख सकै तो भगवान री मैर सूं थारै  बरस चऊदा रो छोरो भी है अर सरला थारी जाणी पिछाणी है’

‘ ओ किंया....... नीं यार, ओ किंया हो सकै ? अेे सनाढ्य ब्राह्मण अर म्हे सरयूपारीण गोस्वामी, ओ नीं हो सकै.’

‘अंकल, म्हे कठैई को जावां नी, म्हानै थै राख लो, थारै खन्नै.’ सरला री आवाज जाणै किणी आंधै कुवै सूं आई ही जिकी म्है सुणी अर बड़ी मुस्किल सूं अणसुणी करदी.

म्हारै मांयलो डरयोड़ो आदमी साम्ही दीसतै बोझ सूं छुटकारो पावणो चांवतो कै चाणचकै सरला बोली ‘ अंकल पापा केवंता......कै बांरी नौकरी म्हानै मिल जिसी.’

‘ ना बेटी, ईं रै मांय तो भोत लम्बो बगत लागसी, अबार थूं आठवीं मांय पढै अर थान्नै अठा’रा बरस आंवता अजै पांच बरस और लागसी अर म्हारै सारू ओ पाॅसिबल नीं है कै पांच बरस तांई म्है....... पांच साल ताणी थारी निगै......., अर फेरूं मामोजी किसा पराया है ? आपणा है, थान्नै साम्ह ई सी.’

आस रा सगळा आडा ढकीजतां देख सरला रै मुण्डै सूं निसरयो ‘ ठीक है अंकल, म्है उड़ जिस्यां, मामोजी साथै उड़ जिस्यां.’ अर घर रै ताळो लगा’र सरला चाबी मामै नै झलाय दी जाणै आपणो भवीस बींरै हाथ सूंप्यो हुवै. ते’रा बरसां री टाबर इत्ती स्याणी कियां हो जावै, ओ म्हानै आठ बरस पैली ठाह लाग्यो हो. गणेसी री मुळक अर सरला री उदासी म्हूं आज तांइ नीं बिसरा सक्यो हूं.

अर आज सरला री मौत रो समचार पूग्यो है, अर म्हैं सोचूं हूं कै बींरी हत्या कुण करी ? रमेस पचैरी, का गणेसी अर का पछै बींरै सासरलां ? दुनिया री कोई कचेड़ी म्हानै हत्यारो बता’र हथकड़ी नीं पैराय सकै पण म्है सरला रो हत्यारो, आज भोत गैराई सूं सोच रयो हूं कै विमला अबार कठै होयसी ? कठैई बींरी हत्या रो इल्जाम ई म्हारै माथै नीं आवण आळो है ?
                                                                   *****


1 comment:

  1. दरद‌ सूं भरयोड़ी गाथा।

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