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Tuesday 9 April 2024

सुप्रसिद्ध रंगकर्मी और साहित्यकार मधु आचार्य के जन्मदिवस पर एक यादगार शाम का आयोजन


कभी तो आसमान से चांद उतरे ज़ाम हो जाए 

तुम्हारा नाम की भी एक सुहानी शाम हो जाए....

सोमवार की शाम कुछ ऐसी ही यादगार रही. अवसर था जाने-माने रंगकर्मी, वरिष्ठ साहित्यकार और भास्कर में लंबे समय तक संपादक रहे अग्रज मधु जी आचार्य के 65वें जन्मदिवस का. बीकानेर के मित्रों ने इस अवसर पर एक शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया. एक ऐसी शाम, जिसके आनंदोल्लास में बीकानेर शहर के तो समर्पित रंगकर्मी और शब्दसाधक थे ही, राजस्थान भर से भी मित्र लोग पधारे. 


मेरा सौभाग्य रहा, मुझे रंगकर्म और साहित्य के संवाहक आदरणीय डॉ. अर्जुनदेव चारण, हिंदी के विद्वान डॉ. माधव हाडा और राजस्थानी के विभागाध्यक्ष डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित के सानिध्य में मधुजी आचार्य के कथा सृजन पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलने का अवसर प्राप्त हुआ. मधुरम परिवार और बीकानेर के स्नेहीजनों ने इस अवसर पर भरपूर मान सम्मान दिया, उसके लिए आभार. ऊर्जावान लाडेसर हरीश बी. शर्माजी को इस स्नेह भरे नूंते के लिए लखदाद !

मुझे कहना चाहिए कि शताधिक पुस्तकों के रचयिता मधु आचार्य का व्यक्तित्व और कृतित्व इतना विस्तार लिए है कि हम सोचने को विवश हो जाते हैं कि आखिर यह आदमी एक साथ इतना कुछ कैसे कर पाता है. राष्ट्रीय स्तर के दैनिक समाचार पत्र में गंभीरता से पत्रकारिता और संपादन, रंगकर्म में नित नवप्रयोग और साहित्य की अलग-अलग विधाओं में भरपूर सृजन का एक साथ होना अत्यंत कठिन है. एक समर्पित पत्रकार की दिनचर्या अत्यंत व्यस्त रहती है, दिन भर फील्ड में काम करना और देर रात तक डेस्क संभालने के बाद समय बचता ही कहां है लेकिन इसके बावजूद मधु आचार्य ने वर्षों से अपने सृजन में निरंतरता बनाए रखी है, यह वाकई कमाल है. साहित्य अकादमी में राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के समन्वयक के रूप में मधु आचार्य ने न सिर्फ नए युवा रचनाकारों को अवसर देकर प्रोत्साहित किया बल्कि लेखन, संपादन और अनुवाद के साथ प्रदेश भर में सेमिनार्स/कार्यशालाओं के आयोजन कर नए आयाम स्थापित किए हैं. इतना कुछ होने के बावजूद उनकी खासियत यह है कि वह कभी अपनी विद्वता को ओढ़ते नहीं. उनकी सरलता और सादगी मिलने वाले को प्रभावित करती है. यही कारण है कि सिर्फ बीकानेर ही नहीं, देशभर में उनके मुरीद हैं. 

इस कार्यक्रम के बहाने बीकानेर के लगभग सभी मित्रों से मुलाकात हुई, उनके साथ 'जीमण' का आनंद लिया. यह भी एक सुखद उपलब्धि रही. कार्यक्रम के यादगार छायाचित्र भेजने के लिए ऊर्जावान बीकानेरी भायले संजय पुरोहित का आभार. यारियां जिंदाबाद !

Sunday 7 April 2024

'राम से सीता करे सवाल...' ने बांधा समां


- लोकप्रिय कवि नंद सारस्वत स्वदेशी के सम्मान में गोष्ठी का आयोजन


सूरतगढ़ 7 अप्रैल। " भाषा और साहित्य संस्कृति के संवाहक हैं जो मानवीय संवेदनाओं और मूल्यों को निरंतर सहेजने का काम करते हैं।" दक्षिण भारत में हिंदी की अलख जगा रहे लोकप्रिय कवि नंद साारस्वत ने इक्कीस संस्थान ये उद्गार व्यक्त किये।

रविवार को 'आंचल प्रन्यास' और 'स्वर फाउंडेशन' के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित काव्य गोष्ठी में बोलते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि कविता और किताब समाज को पथभ्रष्ट होने से रोकते हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने अपनी छंदबद्ध रचनाओं से कार्यक्रम में समां बांध दिया। उनकी रचना 'राम से सीता करे सवाल...' को भरपूर सराहना मिली। गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्यकार रामेश्वर दयाल तिवाड़ी ने की और विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ शायर परमानंद 'दर्द' उपस्थित रहे।

डॉ. मदन गोपाल लढ़ा ने मुख्य अतिथि का माल्यार्पण के साथ स्वागत किया। गोष्ठी में रामकुमार भांभू, डॉ.हर्ष भारती नागपाल, महेंद्र नागर, श्योपत मेघवाल, परमानंद दर्द, रामेश्वर दयाल तिवारी डॉ. मदन गोपाल लढा, राजेश चड्ढा, हरिमोहन सारस्वत ने काव्य पाठ किया। पंकज शर्मा और देवेंद्र आर्य ने अपने गीतों से कार्यक्रम को रोचक बना दिया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि को शाल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन राजेश चड्ढा ने किया और उमेश मुद्गल ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया ।

Sunday 31 March 2024

सूरतगढ़ के लाल ने जयपुर में ठोकी ताल

-जयपुर शहरी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं नरेंद्र शर्मा


सूरतगढ़/जयपुर। चुनाव कोई भी हो, लड़ने के लिए जिगरा चाहिए। और बात जब लोकसभा चुनाव की हो तो हौसले के साथ-साथ तन, मन धन का समर्थन भी जरूरी है। राजधानी की सामान्य सीट से इस बार सूरतगढ़ के लाल ने ताल ठोकी है। वार्ड नंबर 23 के रहने वाले नरेंद्र शर्मा ने राष्ट्रीय सनातन पार्टी के प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। इतना ही नहीं, वे अपने समर्थकों के साथ जोरों-शोरों से जयपुर की सड़कों पर धुआंधार प्रचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि राजस्थान में वे अपनी पार्टी के प्रदेशध्यक्ष भी हैं।
नरेंद्र शर्मा का नाम सूरतगढ़ के लिए अपरिचित नहीं है। उच्च शिक्षा प्राप्त नरेंद्र शर्मा भू राजस्व कानूनों के गहन जानकार हैं। यह खूबी उन्हें विरासत में मिली है। उनके पिता श्री ताराचंद शर्मा इलाके भर में योग्य और कुशल पटवारी के रूप में जाने जाते थे। उनके ताऊ श्री भगवती प्रसाद शर्मा राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश थे।

नरेंद्र शर्मा जन समस्याओं के समाधान हेतु जूझते नेताओं की अग्रणी पंक्ति में खड़े नजर आते हैं । उन्होंने शहर में हुए अवैध कब्जों और गैर कानूनी ढंग से काटी गई कॉलोनी को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय में रिट लगा रखी है जिससे भूमाफियाओं में खलबली मची हुई है।

उल्लेखनीय है कि जयपुर शहरी लोकसभा सीट पर 8 प्रत्याशियों ने नामांकन भरे हैं। कांग्रेस की तरफ से पूर्व परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और भाजपा की मंजू शर्मा मैदान में है। चुनाव परिणाम चाहे कुछ भी रहे लेकिन इतना तो तय है कि नरेंद्र शर्मा के रूप में सूरतगढ़ की आवाज राजधानी में गूंज रही है।


सुप्रसिद्ध रंगकर्मी और साहित्यकार मधु आचार्य के जन्मदिवस पर एक यादगार शाम का आयोजन

कभी तो आसमान से चांद उतरे ज़ाम हो जाए  तुम्हारा नाम की भी एक सुहानी शाम हो जाए.... सोमवार की शाम कुछ ऐसी ही यादगार रही. अवसर था जाने-माने रंग...

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