Search This Blog

चीकणा घड़ा

चीकणा घड़ा

चीकणा घड़ा रे म्हे तो चीकणा घड़ा
पाणी मांखर काढ लेवां दाल रा बड़ा

बात बात पर फूरां जात जात पर फुरां
हाथां में सत है कठै जीभ सूं लड़ां

राज नै रूखाल़ता म्हे भेद नीं करां
हाथ्यां नै काड देवां कीड़ी पर अड़ां

प्रेम प्यार रीत राग मन री मनवार है
आंवते बटाऊ देख आडो जड़ां

सांच झूठ पाप पुन्न बगत रा है बायरा
जचै जिसी बात नै म्हे गोडै घड़ांं

बिरखा उडीकता पण छांट नीं पड़ी
धन है म्हारा सांवरा थे पटक्या गड़ा.
-रूंख

No comments:

Post a Comment

आलेख पर आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है. यदि आलेख पसंद आया हो तो शेयर अवश्य करें ताकि और बेहतर प्रयास किए जा सकेंं.

पृथ्वी मील की लोकप्रियता ने बिगाड़े सारे समीकरण, जेजेपी रच सकती है नया इतिहास

  प्रचार के अंतिम दिन शहर में घर-घर पहुंचे जेजेपी कार्यकर्ता सूरतगढ़, 23 नवंबर। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन जननायक जनता पार्टी के सैकड़ो कार्य...

Popular Posts