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Sunday 7 April 2024

'राम से सीता करे सवाल...' ने बांधा समां


- लोकप्रिय कवि नंद सारस्वत स्वदेशी के सम्मान में गोष्ठी का आयोजन


सूरतगढ़ 7 अप्रैल। " भाषा और साहित्य संस्कृति के संवाहक हैं जो मानवीय संवेदनाओं और मूल्यों को निरंतर सहेजने का काम करते हैं।" दक्षिण भारत में हिंदी की अलख जगा रहे लोकप्रिय कवि नंद साारस्वत ने इक्कीस संस्थान ये उद्गार व्यक्त किये।

रविवार को 'आंचल प्रन्यास' और 'स्वर फाउंडेशन' के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित काव्य गोष्ठी में बोलते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि कविता और किताब समाज को पथभ्रष्ट होने से रोकते हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने अपनी छंदबद्ध रचनाओं से कार्यक्रम में समां बांध दिया। उनकी रचना 'राम से सीता करे सवाल...' को भरपूर सराहना मिली। गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्यकार रामेश्वर दयाल तिवाड़ी ने की और विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ शायर परमानंद 'दर्द' उपस्थित रहे।

डॉ. मदन गोपाल लढ़ा ने मुख्य अतिथि का माल्यार्पण के साथ स्वागत किया। गोष्ठी में रामकुमार भांभू, डॉ.हर्ष भारती नागपाल, महेंद्र नागर, श्योपत मेघवाल, परमानंद दर्द, रामेश्वर दयाल तिवारी डॉ. मदन गोपाल लढा, राजेश चड्ढा, हरिमोहन सारस्वत ने काव्य पाठ किया। पंकज शर्मा और देवेंद्र आर्य ने अपने गीतों से कार्यक्रम को रोचक बना दिया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि को शाल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन राजेश चड्ढा ने किया और उमेश मुद्गल ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया ।

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