पुन्न बडेरां रा आछा, बरकत है बां री रीतां में
तिंवार बणाया इस्या इस्या गाया जावै जका गीतां में
राजी राखै रामजी ! आज बात आपणै तिंवारां री। जूनी कैबत है, ‘वार बड़ा का तिंवार !’ आपणै लोक में तिंवार सदांई मोटा मानीजै। मायतां री मानां तो मंगळ नै सवार नीं कराणी, नख नीं काटणा, बुध नै छोरी, अर थावर नै बीनणी ब्हीर नीं करणी, बिस्पत नै गाभा नीं धोणा, अदीत नै तुळछां पाणी नीं घाळणो पण जेे उण दिन तिंवार होवै तो सब नै छूट है। राग रंग, हांसी खुसी, पैरणो ओढणो, मेळा मगरिया, मीठै री मनवारां...... सो ई कीं तो लाधै तिंवारा में। साची बात तो आ, तिंवार आपणी जियाजूण में रंगत ल्यावै, जणाई तो आपां सै उडीकां तिंवारां नै।
हेत री हथाई में आपां लोक री अेक बात सूं आगै बधां, ‘तीज तिंवारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर’। जूनी कैबत है आ, सावण री तीज जिण नै ‘हरियल तीज’ का पछै ‘छोटी तीज’ कहिजै, बठै सूं मरूधर में तिंवारां री सरूआत होवै, उण पछै सीरण सी बंध जावै। रखपुन्यु, सातूड़ी तीज, गोगा नम्यूं, रामदेवजी रो मेळो, जन्मास्टमी, दसे’रो, करवा चौथ, दियाळी, भाईदूज, रामरमी तंई सीरण टूटै ई कोनी। होळी रै पछै जद छोर्यां माटी री गौरमाता नै नदी नाडै तिरा देवै तो उण रै पछै चार मईनां तंई कोई तीज तिंवार नीं आवै। कैवण रो भाव गौर माता रै डूबतां ई तिंवारा री सीरण टूट जावै। कम्पीटिसन रै पढेसर् यां नै चेतै दिराय दूं, कै अे सै बातां आरएएस री मुख्य परीक्षा में भी पूछेड़ी है, भळै पूछतां आरपीएससी नै कुण रोकै !
तो आगै बधां, रखपुन्यू रै तीन दिनां पछै आवती तीज रो तिंवार घणो चावो ठावो। मारवाड़ में आ तीज सैं सूं बड़ी गिणीजै, इण नै सातूड़ी तीज, कजळी तीज अर बूढी तीज ई कहीजै। इण मौकै भूंदेड़ी कणक, चिणा अर चावळां सूं सातू बणाइजै। जिकी छोरी रो रिस्तो होयोड़ो होवै, इण तीज पर सासरला उण रै सारू ‘सुनारो’ भेजै जिणमें टूमटाकी सूं लेय’र बणाव सिणगार रो सो सामान होवै। छोरी रै पीहरला ई उण रै सासरै सातू री बटड़्यां, फळीहार अर तीवळ तागो भेजै, कंवर साब सारू चावळ रै सातू रो सिणगार्योड़ो बारो न्यारो पुगाइजै। बास गवाड़ री लुगायां इण दिन निराहर रैय’र बरत करै। घरै लकड़ी रै पाटै पर पाणी री तळाई मांडै, खूब बणाव सिणगार करै, सिंझ्या तीज री कहाणी सुणै, तळाई रै पाणी में आपरा गैणा गांठी, सातू, फळ आद नै निरखै, रात नै चांद देख’र बरत खोलै। अमर सुहाग री कामना रो ओ उच्छब घणां लाडां कोडां मनाइजै।
गोगै जी रै मेळै री कांई बात ! उत्तर भारत रो सैं सूं मोटो मेळो गोगामेड़ी में ई तो लागै जठै राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेष, उत्तरप्रदेष, उत्तराखंड तंई रा लाखूं जातरू आवै। गोगै नम्यू रै दिन आपणै देहाती घरां में ‘थेऊ’ राखीजै। थेऊ.....भूलग्या ! अरे भई, उण दिन घर रै दुधारू पसुवां रो दूध जमावै कोनी, बेचै कोनी, फगत घरां में बांटीजै का पछै उण री खीर बणाइजै, आ आस्था री बात है। सेई रा चास्कू गोगै नै मीठी सेई सारू उडीकबो करै। गांवां में तो अजेई आटै री सेई बणावणै रो खासा चलन है, अबै लुगायां घड़ै पर सेई बटणी छोड दी, मसीन आवण सूं बां रै ई कीं सोरपाई होगी। कैर रै कंटीलै ढे’रां पर सूकती सेइयां सूं आवतै जावतै नै ठाह लाग जावै, गोगो आवण आळो है। गुड़ खांड रळा’र बणी अे सेइयां मैदै री ‘मैगी’ अर ‘नूडल्स’ नै कड़खै बिठाणै। नम्यू रै दिन लुगायां माटी रा गोगोजी अर केसरो कंवर बणाय’र बान्नै पळिंडै में राखै अर धोक देवै। गा रै गोबर सूं देई थानां में गोगैजी अर केसरैजी रा घुड़ला मांडिजै। बांरै सेई, खीर अर चिटकी रो भोग लगाइजै। रखपुन्यू री राखड़्यां गोगै जी रै ई चढाइजै। ‘हे गोगा पीर, थारी डोरड़्यां जेवड़्यां नै सांवटे राख्या, टाबरियां पर मैर कर् या। सांप सळीकै सूं बचावण री कामना ई तो करां गोगैजी महाराज सूं।
इण रै पछै आवतै रामसा पीर रै मेळै रो कैवणो ई के ! रूणीचै रा धणिया, अजमाल जी रा कंवरा, माता मैणादे रा लाल, राणी नेतल रा भरतार, म्हारो हेलो सुणो नीं रामापीर...। सड़कां पर बाजता डीजे, जिग्यां-जिग्यां लागता भंडारा, भंडारां में जीमता जातरू, नाचता, गावता, मोद मनावता रामदेवरै पूगै। हिंदू मिंयै री बधती बातां रै इण अबखै दौर में आपां सै ठम’र सोचां यार, गोगोजी, रामदेवजी पीरां दांई पूजीजै, देवता दांई धोकिजै, कोई जात-पांत रो भेद ई नीं, मेघवाळ सूं लेय’र बामण बाणिया, हिंदू, मियां, सरदार तकात......तो पछै बां रो धरम किस्यो...! म्हूं जाणूं, आपां गोगैजी रामदेवजी रै धरम नै ई मन सूं अंगेजल्यां तो ई राड मिट जावै।
तीज सूं सरू होई तिंवारां री आ सीरण ठमै ई कोनी। किरसन भगवान री जलमास्टमी रा आनंद कुण नीं लेवै। रामलीला अर दसे’रै रा रंग चौफेर चावा ठावा। दियाळी रा पछै लारै दिन ई कित्ता’क। तिंवारां री सिरमौर है दियाळी, उण दिन तो आखो देस ई जगमगा उठै। रामरमी रा सैंस्कार फेर और कठै लाधै ! तिंवारां री रंगत ई है जिण रै पाण मिनखा जियाजूण में प्रेम प्यार अर उजळा रंग सांचरै, रूसेड़ा भाई बेल्यां नै ई तिंवार रै मौकै मनाइजै। फिल्मी दुनिया रा चावा ठावा राजस्थानी गीतकार भरत व्यास रो अेक दूहो चेतै आवै-
पुन्न बडेरां रा आछा, बरकत है बां री रीतां में
तिंवार बणाया इस्या इस्या गाया जावै जका गीतां में
आज री हथाई रो सार ओ है, कै तिंवारां रै मिस रास रंग, हांसी खुसी आपरी जियाजूण में बणी रैवै। बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बस्सो....।
-रूंख भायला