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Sunday 16 May 2021

सावधान ! बिगड़ रहे हैं हालात

 

- 24 घंटों में कोविड केयर सेंटर में 5 व्यक्तियों की मौत
- संदेह के घेरे में है मौत के सरकारी आंकड़े
- शहर में बढ़ रहे खतरे की गंभीर दास्तां


सूरतगढ़ के राजकीय चिकित्सालय में बने कोविड केयर सेंटर में पिछले 24 घंटों में 5 व्यक्तियों की मौत हो गई है जबकि प्रशासनिक आंकड़ा पूरे गंगानगर जिले में ही इसे शून्य बता रहा है. 

सूरतगढ़ में कोविड-19 का असर कितना गंभीर है, इसे सरकारी आंकड़ों की बजाय यथार्थ के धरातल पर देखा जाना जरूरी है. सरकारी दावे भले ही स्थिति को नियंत्रण में बता रहे हों लेकिन वास्तविकता यह है कि इस बीमारी से होने वाली मौतों में निरंतर इजाफा हो रहा है.

कोविड केयर सेंटर में 24 घंटों में हुई 5 व्यक्तियों की मौत का यह मामला इसलिए गंभीर हो जाता है है कि इस सेंटर पर कुल 30 बेड ही उपलब्ध है और इनमें से कोई भी खाली नहीं है. 30 मरीजों में से पांच की मौत होना कोई छोटी बात नहीं है. हालांकि जन सहयोग के चलते इस सेंटर पर तुलनात्मक रूप से जिले के अन्य केंद्रों की अपेक्षा बेहतर भौतिक व्यवस्थाएं हैं लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों और जीवन रक्षक दवाओं व उपकरणों के अभाव के चलते इस केंद्र की जोखिम कम नहीं है जबकि यह सामुदायिक केंद्र जिला मुख्यालय के बाद सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र है. 

संदेह के घेरे में है मौत के सरकारी आंकड़े


गंभीर बात यह है कि इस केयर सेंटर पर भर्ती होने वाले रोगियों के कोरोना संक्रमण की जांच रिपोर्ट ही समय पर उपलब्ध नहीं होती. ऑक्सीजन लेवल नीचे होने और अन्य लक्षणों के आधार पर मरीज को इस केंद्र पर भर्ती कर लिया जाता है. उसे कोरोना है या नहीं, इसकी जांच रिपोर्ट के बगैर ही उसे कोरोना संक्रमितों के साथ भर्ती करना अपने आप में संभावित खतरे को जन्म देना है. इन रोगियों में से जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन उनका कोविड-19 प्रोटोकोल के तहत संस्कार करवाता है. लेकिन मजे की बात देखिए ऐसे रोगी की मृत्यु का आंकड़ा प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होता क्योंकि उस मरीज की मौत कोरोना से हुई अथवा नहीं, इसकी जानकारी प्रशासन को नहीं है. ऐसी असामयिक मौत को कोरोना मृत्यु में शामिल न किया जाना अपने आप में एक मजाक है.

यही कारण है कि पिछले 24 घंटे में इस केंद्र पर मरने वाले 5 व्यक्तियों की गिनती सरकारी आंकड़े में दर्ज नहीं है. जरा सोचिए, मरीज मर चुका है लेकिन उसके संक्रमण की जांच रिपोर्ट अभी तक आई ही नहीं है. प्रशासन को कम से कम इतनी व्यवस्था तो करनी चाहिए कि सेंटर पर भर्ती मरीजों की जांच रिपोर्ट प्राथमिकता के साथ तुरंत उपलब्ध हो सके. दूसरा पहलू भी अत्यंत गंभीर है. कल्पना करें कि जिस व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल कोरोना की बजाय किन्ही अन्य कारणों से घट गया हो, उसे भी संभावित कोरोना पीड़ित मानते हुए संक्रमित रोगियों के साथ भर्ती कर देना कैसा मजाक है !

बहरहाल, रविवार को हुई पांच मौतों का यह मामला सीधा-सीधा खतरे का संकेत है कि सभी लोग संभल जाएं और बचाव के लिए नियमों की पालना करें. संकट की इस घड़ी में सभी से अपेक्षा है कि मास्क पहन कर रखें और बिना काम घर से ना निकलें.

1 comment:

  1. हालात वास्तव में गम्भीर हैं अब तक हम बड़े शहरों की खबरें सुन रहे थे लेकिन अब ये संकट हमारे खुद के शहर तक पहुंच गई है इसलिए जरूरी है कि हम सभी सतर्क हो जाये । व्यवस्था के भरोसे रहने के बजाय खुद ही अपना बचाव करें

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