(भूंडी कॉमेडी करणियै ‘रीलवीरां’ नै अंतस रा ओळमा)
राजी राखै रामजी ! आज बात सोसल मीडिया पर चालती रीलां री, रील बणावणियै ‘रीलवीरां’ री। दुनिया रै कूणै कचूणां तंई जा पूगी फेसबुकिया संस्कृति में सै रातूं रात हिट होवणा चावै। बणावो रील, अर चढाद्यो ! पइसो लागै नै टक्को, आवै ना भावूं कक्को। जे पिलगी, तो सेलिब्रिटी बणग्या ! के आदमी के लुगाई, सै रै अबार अेक गूंग चढ रैयी है...। सोसल मीडिया रै समदर में माछल्यां दांई तिरती डूबती आछी अर माड़ी दोनूं रीलां लाधै। आछी रील जठै मिनख नै कीं सीख दिरावै, च्यार बात सिखावै तो माड़ी कई ताळ उणरी चेतना नै डाफाचूक सो कर देवै। कॉमेडी री रीलां रो कैवणो ई कांई ! कदेई हांसी आवै कदेई रोवणो, पण रील तो रील है।
आज ‘हेत री हथाई’ में बंतळ करस्यां राजस्थानी में बणती कॉमेडी रीलां अर बां रै रीलवीरां री। चेतै आयो कै उतराधै सींवाड़ै रै फेफाणै गांम में अेक चावा कथाकार होया है करणीदान बारहठ, बां लिख्यो -
‘जिंदगी में जित्ती स्याणप री दरकार होवै उण सूं थोड़ी भोत कमती सही, गैली गूंगी बातां भी आपरी निरवाळी ठौड़ राखै।’
बातड़ी साची है, हांसी मजाक अर गैली गूंगी बातां नीं होवै तो जियाजूण जाबक ई नीरस हो जावै। हांसणो भोत जरूरी है, कैबत है ‘हांस्यां हरि मिलै’ पण हांसणै अर मजाक में भी अेक अडेखण होवै, अेक पड़दो होया करै जिण सूं बात रो सत अर तत बण्यो रैवै। कीं काण कायदा तो होवै ई है हांसी अर मजाक रा, नीं पछै बा तो ग्यास गिणीजै, बाढो भलंई !
आप कैयस्यो, हांसी में क्यां रा काण कायदा ! मैं बूझूं, आपां बैन स्वासणी सूं हांसी मजाक करती बेळा सावचेती क्यूं राखां ? आपरै बापूजी सूं कित्तोक मखौल करां ? सीख देवणियै गुरूजी सूं आपां कद मजाक करां ? साची बात आ कै आपणा सैंस्कार है, रिस्तै में जे कोई मोटो लागतो होवै, तो उण सूं मखौल नीं करीजै, पगाणै बैठ’र उण रो माण करीजै। रिस्तां रा काण कायदा मरूधर मानवी सूं बेस्सी कुण जाणै ! आपां बेटी रै घर रो पाणी तक नीं पीवां, जंवाई नै माथै रो मोड़ मानां। बीनणी नै ई जी कारो देय’र बुलावण रा सैंस्कार है अठै। रामजी रै इण देस में गुरू रो रिस्तो मायतां सूं ई पैली अर देवर भौजाई रो रिस्तो मा बेटै बरोबर कथीज्यो है। साळा तो सांपां नै ई प्यारा होवै, इसी कैबतां आपणीं संस्कृति में ई लाधै।
पण सोसल मीडिया रै समदर में थोड़ा ठम’र सोचां दिखाण, राजस्थानी रा घणकरा रीलवीर तो अबार फेसबुकिया मंडी में मरजादा रै आं रिस्तां नै गाजर मूळी दांई तुलावण लाग रैया है, जियां आपणी संस्कृति नै बिडरूप करणै रो सो ठेको आं ई लियोड़ो होवै। मा बेटी होवै, भलंई सासु बीनणी, काको होवै भांवू बाबो, दादै दादी नै ई को बक्स्या नीं आं गैलसप्पां, सगळां नै रीलां में लब्बड़धक्कै लेय’र रेल बणा दी बापड़ां री। भुवा फूंफां रै लारै तो इस्या लाग्या जाणै अे दोनूं जीव गाडी में आयोड़ा होवै। भुवा बापड़ी सदांई हांती री धिराणी गिणीजी, उण रै बिना थारै झुगला टोपी ई कुण लावतो ! पण भुवा नै तो घर री विलेन बणा दियो आं रीलवीरां...!
बेटी रा बापो, फूंफै नै तो बक्सता, समठणी में इण सागी फूंफै नै धरम जायो पूत कैय'र बतळायो हो थारै दादै। जिण दिन बो थारै घरां ढुक्यो, कित्ता कित्ता छेछुवा कर् यि होसी थारै घरआळां ! पण भोळा भाई आज सागी रिस्तै री मरजादा भूलग्या। जीजै साळी री थोड़ी घणी मजाक तो होवै ई है, पण थारी रीलां में तो सासुवां ई जवायां अर फूंफैजी रै लारै पड़गी .....। आं रीलां रै चक्कर में चेतै ई नीं रैयो, कै आपणां टाबर तो रील देखसी बिस्योई ब्यौहार करसी रिस्तां साथै। सोचो दिखाण, काण कायदां री ठौड़ थे के सीखा रैया हो आपणै टाबरां नै ! कित्ता भूंडा लागसी जद थारा टाबर घर आयोड़ै थारै बनेई नै कैयसी, ''ओ फूंफा ! टिकज्या, घणी हैनतैन ना कर...राफ खिंडा द् यूंला !''
अेक दूजै री जातां बखाणता अे रीलवीर दारू नै सोमरस दांई मान बैठ्या है, बान्नै लखावै कै जद तंई रील में ठेकै अर दारू री बात नीं आवै, कस बैठै ई कोनी। स्याणो, कस बैठै कियां, रील में तो थे टिल्ला खावतां बगो अर भावै थान्नै परणेत ! कोई गैलो ई टोरसी थारै लारै आपरी डीकरी, उण रा भाग तो फूट्या ई जाणो ! भूंडा अर दोगला अरथावूू संवाद करतै आं रीलवीरां नै फॉलोवर्स रै सिवाय कीं दीसै ई नीं, भोळपणै में अे आपणी संस्कृति, परम्परा, काण कायदा अर आपोआप रो कित्तो कित्तो नुकसान कर रैया है, बान्नै ठाह ई कोनी।
अेक बात और, भाजानाठी में गबळ-गबळ बोलतां जे कदेई ऊकचूक होगी तो गळ में आई जाण्या...! जकां रै आई है, बांन्नै बकार’र देखल्यो भलंई.., बात 'सर धड़ से जुदा' तंई जा पूगी ही।
आं रीलवीरां में छोरा तो छोरा, छोरियां ई घाट को घालै नीं ! सावण री सिंझ्यां में जियां लोटियै रै चौफेर बरसाती फिड़कला भुंवै, आं सागी हाल कर राख्यो है। कोई दारू रै ठेकै सूं बोतल लावती दीसै तो कोई भूंडा सैण कर कर रिझावणो चावै। आंख्यां रा टमरका करती कई अधनागी बायल्यां तो खुद नै सेरणी न्यारी बतावै ! जद कै बै जाणै, पब्लिक आन्नै लूंकड़ी जित्तो ई नीं गिणै। पण आन्नै तो रील पर भीड़ दीसणी चाइजै, फॉलोवर्स चाइजै। बाई सा ! आपरा डोळ दिखास्यो जणा लोगड़ा तो मजा लेई सी, क्यूं पोत देवो आपरा, आपरै मायतां रां...!
आज री हथाई में इस्यै सगळै रीलवीरां नै रूंख भायलै रो ओ अंतस ओळमो है, कीं तो चेतो यार ! थे कैस्यो, हांसी मजाक सुहावै कोनी भाईजी थान्नै। तो सुणो, हांसण सारू गूंगपणो नीं, बात चाइजै, लारै सूं 'लाफिंग ट्रेक' दियां हांसी कद आवै। हांसण सारू आपणै कन्नै ‘अभनै रा किस्सा’ है, मनोहर शर्मा री ‘हंसोकड़ लोक कथावां’ है, सुदामा जी रो जातरा वृतांत है, बिज्जी री ‘बातां री फुलवारी’ है, दूजै कान्नी थां भायलां री कॉमेडी ! दोनां नै ताकड़ी तोलो दिखाण, मतैई ठाह लाग जासी। रील बणावणियै सगळा भोळा स्याणां नै आ बात चेतै राखणी चाइजै कै आपणी संस्कृति अर सैंस्कारां री जड़ां भोत ऊंडी है, उण री अेक मरजादा है। आज घड़ी आखी दुनिया में आपणो जीमण, पैराव, बोलीचाली अर काण कायदा सराइजैै, जिण सूं राजस्थानियां नै निरवाळी पिछाण मिलै। सेठिया जी रो अेक सांतरो दूहो है-
थे मुरधर रा बाजस्यो बसो कठैई जाय
सैनाणी कोनी छिपै बिरथा करो उपाय
मोहन आलोक ई लिख्यो है -
भासा गई अर गया भेस ई बाकी रैयगी सांस
घूमरी री गै’री घमरोळो बणगी डिस्को डांस
पिछवा चाली पून इसी सैनाण बदळग्या
धर साधू रो भेस ध्यानिया गांम नै छलग्या
बात रो सार ओ है, आपां सगळां ई आंख, कान भेळै डावी हथाळी मोबाइल रै अडाणै मेल दी है, थोड़ा'क दिनां में अंतस चेतना ई खत्म होई जाणो। फेरूं ई चेतावूं कै जिण देस अर संस्कृति रै मांय आपणां पेट पळै, आपां री पीढ्यां पोखीजै उण नै बिडरूप करणै रो कोई काम नीं करणो। हांसण हंसाण सारू खूब रीलां सिरजो, पण बणावती बेळा आपरी जिम्मेदारी ना भूलो !
बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बस्सो....।
-रूंख भायला
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