Search This Blog

Saturday, 16 August 2025

तीज तिंवारां बावड़ी...!


पुन्न बडेरां  रा  आछा, बरकत है बां  री रीतां  में

तिंवार बणाया इस्या इस्या गाया जावै जका गीतां में


राजी राखै रामजी ! आज बात आपणै तिंवारां री। जूनी कैबत है, ‘वार बड़ा का तिंवार !’ आपणै लोक में तिंवार सदांई मोटा मानीजै। मायतां री मानां तो मंगळ नै सवार नीं कराणी, नख नीं काटणा, बुध नै छोरी, अर थावर नै बीनणी ब्हीर नीं करणी, बिस्पत नै गाभा नीं धोणा, अदीत नै तुळछां पाणी नीं घाळणो पण जेे उण दिन तिंवार होवै तो सब नै छूट है। राग रंग, हांसी खुसी, पैरणो ओढणो, मेळा मगरिया, मीठै री मनवारां...... सो ई कीं तो लाधै तिंवारा में। साची बात तो आ, तिंवार आपणी जियाजूण में रंगत ल्यावै, जणाई तो आपां सै उडीकां तिंवारां नै।


हेत री हथाई में आपां लोक री अेक बात सूं आगै बधां, ‘तीज तिंवारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर’। जूनी कैबत है आ, सावण री तीज जिण नै ‘हरियल तीज’ का पछै ‘छोटी तीज’ कहिजै, बठै सूं मरूधर में तिंवारां री सरूआत होवै, उण पछै सीरण सी बंध जावै। रखपुन्यु, सातूड़ी तीज, गोगा नम्यूं, रामदेवजी रो मेळो, जन्मास्टमी, दसे’रो, करवा चौथ, दियाळी, भाईदूज, रामरमी तंई सीरण टूटै ई कोनी। होळी रै पछै जद छोर्यां माटी री गौरमाता नै नदी नाडै  तिरा देवै तो उण रै पछै चार मईनां तंई कोई तीज तिंवार नीं आवै। कैवण रो भाव गौर माता रै डूबतां ई तिंवारा री सीरण टूट जावै। कम्पीटिसन रै पढेसर् यां नै चेतै दिराय दूं, कै अे सै बातां आरएएस री मुख्य परीक्षा में भी पूछेड़ी है, भळै पूछतां आरपीएससी नै कुण रोकै !


तो आगै बधां, रखपुन्यू रै तीन दिनां पछै आवती तीज रो तिंवार घणो चावो ठावो। मारवाड़ में आ तीज सैं सूं बड़ी गिणीजै, इण नै सातूड़ी तीज, कजळी तीज अर बूढी तीज ई कहीजै। इण मौकै भूंदेड़ी कणक, चिणा अर चावळां सूं सातू बणाइजै। जिकी छोरी रो रिस्तो होयोड़ो होवै, इण तीज पर सासरला उण रै सारू ‘सुनारो’ भेजै जिणमें टूमटाकी सूं लेय’र बणाव सिणगार रो सो सामान होवै। छोरी रै पीहरला ई उण रै सासरै सातू री बटड़्यां, फळीहार अर तीवळ तागो भेजै, कंवर साब सारू चावळ रै सातू रो सिणगार्योड़ो बारो न्यारो पुगाइजै। बास गवाड़ री लुगायां इण दिन निराहर रैय’र बरत करै। घरै लकड़ी रै पाटै पर पाणी री तळाई मांडै, खूब बणाव सिणगार करै, सिंझ्या तीज री कहाणी सुणै, तळाई रै पाणी में आपरा गैणा गांठी, सातू, फळ आद नै निरखै, रात नै चांद देख’र बरत खोलै। अमर सुहाग री कामना रो ओ उच्छब घणां लाडां कोडां मनाइजै। 


गोगै जी रै मेळै री कांई बात ! उत्तर भारत रो सैं सूं मोटो मेळो गोगामेड़ी में ई तो लागै जठै राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेष, उत्तरप्रदेष, उत्तराखंड तंई रा लाखूं जातरू आवै। गोगै नम्यू रै दिन आपणै देहाती घरां में ‘थेऊ’ राखीजै। थेऊ.....भूलग्या ! अरे भई, उण दिन घर रै दुधारू पसुवां रो दूध जमावै कोनी, बेचै कोनी, फगत घरां में बांटीजै का पछै उण री खीर बणाइजै, आ आस्था री बात है। सेई रा चास्कू गोगै नै मीठी सेई सारू उडीकबो करै। गांवां में तो अजेई आटै री सेई बणावणै रो खासा चलन है, अबै लुगायां घड़ै पर सेई बटणी छोड दी, मसीन आवण सूं बां रै ई कीं सोरपाई होगी। कैर रै कंटीलै ढे’रां पर  सूकती सेइयां सूं आवतै जावतै नै ठाह लाग जावै, गोगो आवण आळो है। गुड़ खांड रळा’र बणी अे सेइयां मैदै री ‘मैगी’ अर ‘नूडल्स’ नै कड़खै बिठाणै। नम्यू रै दिन लुगायां माटी रा गोगोजी अर केसरो कंवर बणाय’र बान्नै पळिंडै में राखै अर धोक देवै। गा रै गोबर सूं देई थानां में गोगैजी अर केसरैजी रा घुड़ला मांडिजै। बांरै सेई, खीर अर चिटकी रो भोग लगाइजै। रखपुन्यू री राखड़्यां गोगै जी रै ई चढाइजै। ‘हे गोगा पीर, थारी डोरड़्यां जेवड़्यां नै सांवटे राख्या, टाबरियां पर मैर कर् या। सांप सळीकै सूं बचावण री कामना ई तो करां गोगैजी महाराज सूं।


इण रै पछै आवतै रामसा पीर रै मेळै रो कैवणो ई के ! रूणीचै रा धणिया, अजमाल जी रा कंवरा, माता मैणादे रा लाल, राणी नेतल रा भरतार, म्हारो हेलो सुणो नीं रामापीर...। सड़कां पर बाजता डीजे, जिग्यां-जिग्यां लागता भंडारा, भंडारां में जीमता जातरू, नाचता, गावता, मोद मनावता रामदेवरै पूगै। हिंदू मिंयै री बधती बातां रै इण अबखै दौर में आपां सै ठम’र सोचां यार, गोगोजी, रामदेवजी पीरां दांई पूजीजै, देवता दांई धोकिजै, कोई जात-पांत रो भेद ई नीं, मेघवाळ सूं लेय’र बामण बाणिया, हिंदू, मियां, सरदार तकात......तो पछै बां रो धरम किस्यो...! म्हूं जाणूं, आपां गोगैजी रामदेवजी रै धरम नै ई मन सूं अंगेजल्यां तो ई राड मिट जावै।


तीज सूं सरू होई तिंवारां री आ सीरण ठमै ई कोनी। किरसन भगवान री जलमास्टमी रा आनंद कुण नीं लेवै। रामलीला अर दसे’रै रा रंग चौफेर चावा ठावा। दियाळी रा पछै लारै दिन ई कित्ता’क। तिंवारां री सिरमौर है दियाळी, उण दिन तो आखो देस ई जगमगा उठै। रामरमी रा सैंस्कार फेर और कठै लाधै ! तिंवारां री रंगत ई है जिण रै पाण मिनखा जियाजूण में प्रेम प्यार अर उजळा रंग सांचरै, रूसेड़ा भाई बेल्यां नै ई तिंवार रै मौकै मनाइजै।  फिल्मी दुनिया रा चावा ठावा राजस्थानी गीतकार भरत व्यास रो अेक दूहो चेतै आवै-


पुन्न बडेरां  रा  आछा, बरकत है बां  री रीतां  में

तिंवार बणाया इस्या इस्या गाया जावै जका गीतां में


आज री हथाई रो सार ओ है, कै तिंवारां रै मिस रास रंग, हांसी खुसी आपरी जियाजूण में बणी रैवै। बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बस्सो....।

     -रूंख भायला

Monday, 4 August 2025

कोई सीध पीवै तो दीजो ओळमो !


(भूंडी कॉमेडी करणियै ‘रीलवीरां’ नै अंतस रा ओळमा)


राजी राखै रामजी ! आज बात सोसल मीडिया पर चालती रीलां री, रील बणावणियै ‘रीलवीरां’ री। दुनिया रै कूणै कचूणां तंई जा पूगी फेसबुकिया संस्कृति में सै रातूं रात हिट होवणा चावै। बणावो रील, अर चढाद्यो ! पइसो लागै नै टक्को, आवै ना भावूं कक्को। जे पिलगी, तो सेलिब्रिटी बणग्या ! के आदमी के लुगाई, सै रै अबार अेक गूंग चढ रैयी है...। सोसल मीडिया रै समदर में माछल्यां दांई तिरती डूबती आछी अर माड़ी दोनूं रीलां लाधै। आछी रील जठै मिनख नै कीं सीख दिरावै, च्यार बात सिखावै तो माड़ी कई ताळ उणरी चेतना नै डाफाचूक सो कर देवै। कॉमेडी री रीलां रो कैवणो ई कांई ! कदेई हांसी आवै कदेई रोवणो, पण रील तो रील है।


आज ‘हेत री हथाई’ में बंतळ करस्यां राजस्थानी में बणती कॉमेडी रीलां अर बां रै रीलवीरां री। चेतै आयो कै उतराधै सींवाड़ै रै फेफाणै गांम में अेक चावा कथाकार होया है करणीदान बारहठ, बां लिख्यो -


‘जिंदगी में जित्ती स्याणप री दरकार होवै उण सूं थोड़ी भोत कमती सही, गैली गूंगी बातां भी आपरी निरवाळी ठौड़ राखै।’


बातड़ी साची है, हांसी मजाक अर गैली गूंगी बातां नीं होवै तो जियाजूण जाबक ई नीरस हो जावै। हांसणो भोत जरूरी है, कैबत है ‘हांस्यां हरि मिलै’ पण हांसणै अर मजाक में भी अेक अडेखण होवै, अेक पड़दो होया करै जिण सूं बात रो सत अर तत बण्यो रैवै। कीं काण कायदा तो होवै ई है हांसी अर मजाक रा, नीं पछै बा तो ग्यास गिणीजै, बाढो भलंई !


आप कैयस्यो, हांसी में क्यां रा काण कायदा ! मैं बूझूं, आपां बैन स्वासणी सूं हांसी मजाक करती बेळा सावचेती क्यूं राखां ? आपरै बापूजी सूं कित्तोक मखौल करां ? सीख देवणियै गुरूजी सूं आपां कद मजाक करां ? साची बात आ कै आपणा सैंस्कार है, रिस्तै में जे कोई मोटो लागतो होवै, तो उण सूं मखौल नीं करीजै, पगाणै बैठ’र उण रो माण करीजै। रिस्तां रा काण कायदा मरूधर मानवी सूं बेस्सी कुण जाणै ! आपां बेटी रै घर रो पाणी तक नीं पीवां, जंवाई नै माथै रो मोड़ मानां। बीनणी नै ई जी कारो देय’र बुलावण रा सैंस्कार है अठै। रामजी रै इण देस में गुरू रो रिस्तो मायतां सूं ई पैली अर देवर भौजाई रो रिस्तो मा बेटै बरोबर कथीज्यो है। साळा तो सांपां नै ई प्यारा होवै, इसी कैबतां आपणीं संस्कृति में ई लाधै।


पण सोसल मीडिया रै समदर में थोड़ा ठम’र सोचां दिखाण, राजस्थानी रा घणकरा रीलवीर तो अबार फेसबुकिया मंडी में मरजादा रै आं रिस्तां नै गाजर मूळी दांई तुलावण लाग रैया है, जियां आपणी संस्कृति नै बिडरूप करणै रो सो ठेको आं ई लियोड़ो होवै। मा बेटी होवै, भलंई सासु बीनणी, काको होवै भांवू बाबो, दादै दादी नै ई को बक्स्या नीं आं गैलसप्पां,  सगळां नै रीलां में लब्बड़धक्कै लेय’र रेल बणा दी बापड़ां री। भुवा फूंफां रै लारै तो इस्या लाग्या जाणै अे दोनूं जीव गाडी में आयोड़ा होवै। भुवा बापड़ी सदांई हांती री धिराणी गिणीजी, उण रै बिना थारै झुगला टोपी ई कुण लावतो ! पण भुवा नै तो घर री विलेन बणा दियो आं रीलवीरां...!


बेटी रा बापो, फूंफै नै तो बक्सता, समठणी में इण सागी फूंफै नै धरम जायो पूत कैय'र बतळायो हो थारै दादै। जिण दिन बो थारै घरां ढुक्यो, कित्ता कित्ता छेछुवा कर् यि होसी थारै घरआळां ! पण भोळा  भाई आज सागी रिस्तै री मरजादा भूलग्या। जीजै साळी री थोड़ी घणी मजाक तो होवै ई है, पण थारी रीलां में तो सासुवां ई जवायां अर फूंफैजी रै लारै पड़गी .....। आं रीलां रै चक्कर में चेतै ई नीं रैयो, कै आपणां टाबर तो रील देखसी बिस्योई ब्यौहार करसी रिस्तां साथै। सोचो दिखाण, काण कायदां री ठौड़ थे के सीखा रैया हो आपणै टाबरां नै ! कित्ता भूंडा लागसी जद थारा टाबर घर आयोड़ै थारै बनेई नै कैयसी, ''ओ फूंफा ! टिकज्या, घणी हैनतैन ना कर...राफ खिंडा द् यूंला !''


अेक दूजै री जातां बखाणता अे रीलवीर दारू नै सोमरस दांई मान बैठ्या है, बान्नै लखावै कै जद तंई रील में ठेकै अर दारू री बात नीं आवै, कस बैठै ई कोनी। स्याणो, कस बैठै कियां, रील में तो थे टिल्ला खावतां बगो अर भावै थान्नै परणेत ! कोई गैलो ई टोरसी थारै लारै आपरी डीकरी, उण रा भाग तो फूट्या ई जाणो ! भूंडा अर दोगला अरथावूू संवाद करतै आं रीलवीरां नै फॉलोवर्स  रै सिवाय कीं दीसै ई नीं, भोळपणै में अे आपणी संस्कृति, परम्परा, काण कायदा अर आपोआप रो कित्तो कित्तो नुकसान कर रैया है, बान्नै ठाह ई कोनी। 


अेक बात और, भाजानाठी में गबळ-गबळ बोलतां जे कदेई ऊकचूक होगी तो गळ में आई जाण्या...! जकां रै आई है, बांन्नै बकार’र देखल्यो भलंई.., बात 'सर धड़ से जुदा' तंई जा पूगी ही।


आं रीलवीरां में छोरा तो छोरा, छोरियां ई घाट को घालै नीं ! सावण री सिंझ्यां में जियां लोटियै रै चौफेर बरसाती फिड़कला भुंवै, आं सागी हाल कर राख्यो है। कोई दारू रै ठेकै सूं बोतल लावती दीसै तो कोई  भूंडा सैण कर कर रिझावणो चावै। आंख्यां रा टमरका करती कई  अधनागी बायल्यां तो खुद नै सेरणी न्यारी बतावै ! जद कै बै जाणै, पब्लिक आन्नै लूंकड़ी जित्तो ई नीं गिणै। पण आन्नै तो रील पर भीड़ दीसणी चाइजै, फॉलोवर्स चाइजै। बाई सा ! आपरा डोळ दिखास्यो जणा लोगड़ा तो मजा लेई सी, क्यूं पोत देवो आपरा, आपरै मायतां रां...!


आज री हथाई में इस्यै सगळै रीलवीरां नै रूंख भायलै रो ओ अंतस ओळमो है, कीं तो चेतो यार ! थे कैस्यो, हांसी मजाक सुहावै कोनी भाईजी थान्नै। तो सुणो, हांसण सारू गूंगपणो नीं, बात चाइजै, लारै सूं 'लाफिंग ट्रेक' दियां हांसी कद आवै। हांसण सारू आपणै कन्नै ‘अभनै रा किस्सा’ है, मनोहर शर्मा री ‘हंसोकड़ लोक कथावां’ है, सुदामा जी रो जातरा वृतांत है, बिज्जी री ‘बातां री फुलवारी’ है, दूजै कान्नी थां भायलां री कॉमेडी ! दोनां नै ताकड़ी तोलो दिखाण, मतैई ठाह लाग जासी। रील बणावणियै  सगळा भोळा स्याणां नै आ बात चेतै राखणी चाइजै कै आपणी संस्कृति अर सैंस्कारां री जड़ां भोत ऊंडी है, उण री अेक मरजादा है। आज घड़ी आखी दुनिया में आपणो जीमण, पैराव, बोलीचाली अर काण कायदा सराइजैै, जिण सूं राजस्थानियां नै निरवाळी पिछाण मिलै। सेठिया जी रो अेक सांतरो दूहो है-


थे मुरधर रा बाजस्यो बसो कठैई जाय

सैनाणी कोनी छिपै बिरथा करो उपाय


मोहन आलोक ई लिख्यो है -


भासा गई अर गया भेस ई बाकी रैयगी सांस

घूमरी री गै’री घमरोळो बणगी डिस्को डांस

पिछवा चाली पून इसी सैनाण बदळग्या

धर साधू रो भेस ध्यानिया गांम नै छलग्या


बात रो सार ओ है, आपां  सगळां ई आंख, कान भेळै डावी हथाळी मोबाइल रै अडाणै मेल दी है, थोड़ा'क दिनां में अंतस चेतना ई खत्म होई जाणो। फेरूं ई चेतावूं कै जिण देस अर संस्कृति रै मांय आपणां पेट पळै, आपां री पीढ्यां पोखीजै उण नै बिडरूप करणै रो कोई काम नीं करणो। हांसण हंसाण सारू  खूब रीलां सिरजो, पण बणावती बेळा आपरी जिम्मेदारी ना भूलो !


बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बस्सो....।

     -रूंख भायला






तीज तिंवारां बावड़ी...!

पुन्न बडेरां  रा  आछा, बरकत है बां  री रीतां  में तिंवार बणाया इस्या इस्या गाया जावै जका गीतां में राजी राखै रामजी ! आज बात आपणै तिंवारां री...

Popular Posts